अंगारक दोष निवारण पूजा
मंगल और राहु की युति से होने वाली अशांति, क्रोध, मुकदमों व दुर्घटनाओं का वैदिक निवारण
अंगारक दोष क्या है और इसके प्रभाव?
जब किसी जातक की जन्मकुंडली के किसी भी भाव में मंगल ग्रह और राहु ग्रह (या केतु) एक साथ बैठ जाते हैं, तो 'अंगारक दोष' का निर्माण होता है। मंगल अग्नि तत्व का स्वामी है और राहु वायु/धुएं का। जब ये दोनों मिलते हैं, तो एक प्रचंड आग (अंगारे) जैसी स्थिति बनती है। इस दोष के कारण व्यक्ति अत्यधिक हिंसक व क्रोधी स्वभाव का हो जाता है। उसे जमीन-जायदाद के विवादों, कानूनी मुकदमों, रक्त विकार, बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं और भाइयों के साथ गहरे मनमुटाव का सामना करना पड़ता है। उज्जैन में मंगल देव की शांति और राहु की अनुकूलता के लिए विशेष अंगारक शांति यज्ञ कराया जाता है।
उज्जैन में पूजा का महत्व:
उज्जैन मंगल की जन्मभूमि है और यहाँ के अवंतिका क्षेत्र में राहु-केतु के दुष्प्रभावों को शांत करने के प्राचीन तांत्रिक और वैदिक विधान उपलब्ध हैं, जिससे यह स्थान सर्वश्रेष्ठ है।
पूजा विधि (Step-by-Step Vidhi)
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1सकल्प पूजन: अंगारक दोष की शांति और मन की एकाग्रता का यजमान द्वारा संकल्प।
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2गणपति पूजन: पूजा की निर्विघ्नता के लिए प्रथम पूज्य देव का स्मरण।
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3मंगल व राहु मंडल स्थापन: मंगल देव (लाल पीठ) और राहु देव (काली पीठ) की स्थापना।
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4मंत्र जाप: मंगल देव के अंगारक मंत्र तथा राहु के बीज मंत्रों का वैदिक ब्राह्मणों द्वारा जाप।
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5अंगारक शांति हवन: खैर और दूर्वा की समिधा के साथ लाल चंदन, काले तिल व घी की आहुति।
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6दान क्रिया: पूजा समाप्ति के बाद तांबा, लाल वस्त्र, मसूर की दाल और राहु से संबंधित लोहे व काले तिल का दान।
आवश्यक पूजा सामग्री (Samagri List)
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calendar_month शुभ पूजा मुहूर्त 2026
मंगलवार को पड़ने वाली चतुर्थी योग
मंगल देव का विशेष दिवस
मंगल के नक्षत्रों में विशेष पूजन
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