मंगल दोष भात पूजा
विश्व के एकमात्र मंगल जन्मस्थान मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन में मंगल दोष निवारण भात पूजा
मंगल दोष क्या है और इसके प्रभाव?
कुंडली में जब मंगल ग्रह प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होता है, तो 'मंगल दोष' (जिसे मांगलिक दोष भी कहते हैं) का निर्माण होता है। इस दोष के कारण जातक के विवाह में अत्यधिक विलंब होता है, वैवाहिक जीवन में कलह, तलाक या जीवनसाथी के स्वास्थ्य में भारी समस्याएं आती हैं। इसके अतिरिक्त जातक में उग्रता, क्रोध और रक्त संबंधी विकार देखे जाते हैं। उज्जैन के अति प्राचीन मंगलनाथ मंदिर में होने वाली भात (पके हुए चावल) पूजा के माध्यम से मंगल देव की तपन को शांत किया जाता है जिससे मांगलिक दोष के कुप्रभाव समाप्त होते हैं।
उज्जैन में पूजा का महत्व:
उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर संपूर्ण ब्रह्मांड में मंगल देव का जन्मस्थान माना जाता है। यहाँ पर कर्क रेखा ठीक शिवलिंग के ऊपर से गुजरती है, जिससे यहाँ की भौगोलिक और ब्रह्मांडीय ऊर्जा मंगल शांति के लिए विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।
पूजा विधि (Step-by-Step Vidhi)
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1मंगलनाथ आगमन व संकल्प: मंगल देव के गर्भगृह में मंगल शांति का संकल्प।
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2गणपति व कलश पूजन: मंगल कलश की स्थापना व षोडशोपचार पूजन।
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3शिवलिंग अभिषेक: पंचामृत व जलाभिषेक द्वारा शुद्धिकरण।
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4भात पूजन (प्रमुख चरण): पके हुए भात (चावल) से शिवलिंग को पूरी तरह ढककर श्रृंगार करना।
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5दही-शक्कर लेपन: भात पर दही व बूरा (शक्कर) का लेप करना (ठंडक प्रदान करने हेतु)।
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6आरती व मंगल स्तोत्र: आरती कर मंगल देव से आशीर्वाद मांगना।
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7विसर्जन: पूजा के उपरांत भात का शास्त्रीय नियमों से विसर्जन।
आवश्यक पूजा सामग्री (Samagri List)
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calendar_month शुभ पूजा मुहूर्त 2026
आषाढ़ कृष्ण पक्ष सप्तमी (शुभ योग)
भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी
कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया
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