flare ✦ वैदिक अनुष्ठान विवरण

गुरु चांडाल दोष निवारण पूजा

बृहस्पति और राहु की युति को शांत कर बुद्धि की शुद्धि, मानसिक भ्रम की समाप्ति और ज्ञान व यश की प्राप्ति

गुरु चांडाल दोष क्या है और इसके प्रभाव?

जन्मकुंडली में जब देवगुरु बृहस्पति (गुरु) और राहु (या केतु) की युति होती है, तो उसे 'गुरु चांडाल दोष' कहा जाता है। गुरु ज्ञान, विवेक, धर्म, संतान और धन के कारक हैं, जबकि राहु भ्रम, नास्तिकता और अनैतिकता के। इस दोष के कारण व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट होने लगती है, वह गुरुजनों और बड़ों का अनादर करता है, गलत संगत में पड़ता है, उसके मान-सम्मान में कमी आती है और संचित धन नष्ट हो जाता है। उज्जैन की पावन भूमि पर गुरु-राहु शांति अनुष्ठान कराकर जातक अपने विवेक को पुनः जागृत कर सकता है।

उज्जैन में पूजा का महत्व:

उज्जैन वह पवित्र स्थान है जहाँ सांदीपनि आश्रम में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने शिक्षा और गुरु दीक्षा ग्रहण की थी। यहाँ बृहस्पति और राहु की शांति पूजा बुद्धि और विद्या दोषों का संपूर्ण शमन करती है।

पूजा विधि (Step-by-Step Vidhi)

  1. 1
    गोत्र-नाम संकल्प: बुद्धि, विवेक और संचित धन की रक्षा के लिए यजमान द्वारा संकल्प।
  2. 2
    गुरु व राहु देव आवाहन: बृहस्पति देव (पीली पीठ) और राहु देव (काली पीठ) की स्थापना व ध्यान।
  3. 3
    मंत्र जाप: गुरु के पीत मंत्रों और राहु के शांत मंत्रों का निश्चित संख्या में जाप।
  4. 4
    गुरु चांडाल शांति हवन: पीपल की समिधा, हल्दी, चने की दाल और पीले पुष्पों से आहुति देना।
  5. 5
    स्वर्ण / पीतल दान: यजमान द्वारा पीले वस्त्र, हल्दी की गांठे, चने की दाल और दक्षिणा का दान।

आवश्यक पूजा सामग्री (Samagri List)

flare पीले वस्त्र और काले/नीले वस्त्र (1.25 मीटर)
flare साबुत चने की दाल (500 ग्राम), हल्दी की गांठें
flare केसर, पीला चंदन, हल्दी पाउडर
flare पीले फूल (गेंदा), बेलपत्र, अक्षत
flare शुद्ध घी, शहद, कपूर, धूप
flare पीपल की समिधा (हवन हेतु)
flare तांबे या पीतल का कलश, नारियल, सुपारी
flare ब्राह्मण भोज हेतु पीले मिष्ठान्न (लड्डू)
🌟 गुरु अनुकूलता उपाय: इस दोष से मुक्ति के लिए यजमान को नित्य मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाना चाहिए और प्रत्येक गुरुवार को गाय को चना दाल और गुड़ खिलाना चाहिए।
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