नवग्रह शांति पूजा
नौ ग्रहों के अरिष्ट प्रभावों को शांत कर जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति
नवग्रह दोष क्या है और इसके प्रभाव?
मानव जीवन पर नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) की चाल और स्थिति का सीधा प्रभाव पड़ता है। जब कुंडली में एक या एक से अधिक ग्रह नीच, पीड़ित या शत्रु राशि में होते हैं, तो वे जातक को पारिवारिक कष्ट, आर्थिक हानि, मानसिक तनाव और रोगों से ग्रसित करते हैं। नवग्रह शांति पूजा के माध्यम से सभी नौ ग्रहों के आराध्य देवों का पूजन कर उनके बीज मंत्रों का जाप किया जाता है, जिससे ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं और वे शुभ फल देने लगते हैं।
उज्जैन में पूजा का महत्व:
उज्जैन ज्योतिष शास्त्र और खगोल विज्ञान की ऐतिहासिक राजधानी रहा है। यहाँ नवग्रहों के प्राचीन सिद्ध मंदिर स्थापित हैं, जिससे यहाँ किया गया नवग्रह पूजन अत्यधिक प्रभावशाली होता है।
पूजा विधि (Step-by-Step Vidhi)
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1शुद्धि व संकल्प: यजमान द्वारा नाम, गोत्र उच्चारित कर ग्रहों की अनुकूलता का संकल्प।
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2गणपति व गौरी पूजन: समस्त विघ्न-बाधाओं की शांति के लिए गणेश-गौरी पूजन।
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3कलश स्थापना: तीर्थ जलों से पूरित वरुण कलश की स्थापना।
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4नवग्रह मंडल पूजन: 9 ग्रहों की विशेष पीठ बनाकर अक्षत व पुष्पों से आह्वान व स्थापन।
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5ग्रह मंत्र जाप: प्रत्येक ग्रह के अधिष्ठाता देव के वैदिक या तांत्रिक मंत्रों का जाप।
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6नवग्रह हवन: नवग्रहों की विशेष समिधाओं (जैसे आक, पलाश, खैर, अपामार्ग) से आहुति देना।
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7आरती व दान: आरती के उपरांत प्रत्येक ग्रह से संबंधित वस्तुओं (अनाज, वस्त्र, धातु) का दान।
आवश्यक पूजा सामग्री (Samagri List)
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calendar_month शुभ पूजा मुहूर्त 2026
मासिक पूर्णिमा तिथि पर शुभ योग
चंद्रमा के अनुकूल नक्षत्रों में
वर्ष के विशेष पुष्य नक्षत्र योग
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