flare ✦ वैदिक अनुष्ठान विवरण

पितृ दोष निवारण पूजा

सिद्धवट घाट (उज्जैन) पर पितरों के तर्पण, पिंडदान, त्रिपिंडी श्राद्ध एवं नारायण बलि द्वारा मुक्ति अनुष्ठान

पितृ दोष क्या है और इसके लक्षण?

जब परिवार में पूर्वजों (पितरों) का विधिपूर्वक तर्पण या पिंडदान नहीं होता, या किसी पूर्वज की अकाल मृत्यु हो जाती है, तो कुंडली में 'पितृ दोष' उत्पन्न होता है। इसके लक्षणों में परिवार में संतान न होना (वंश वृद्धि रुकना), विवाह न होना, संतान का अस्वस्थ रहना, घर में निरंतर अशांति रहना और कड़ी मेहनत के बाद भी धन की तंगी बने रहना शामिल है। शिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट मंदिर पर पिंडदान और त्रिपिंडी श्राद्ध करने से पितृ संतुष्ट होते हैं और परिवार को उन्नति व सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं।

उज्जैन में पूजा का महत्व:

उज्जैन के शिप्रा नदी तट पर स्थित 'सिद्धवट' (अक्षय वट) को पितृ कार्यों के लिए गया (बिहार) के समान फलदायी माना गया है। देवी पार्वती द्वारा रोपित इस वट वृक्ष के नीचे किया पिंडदान पितरों को सीधे तृप्ति देता है।

पूजा विधि (Step-by-Step Vidhi)

  1. 1
    तर्पण (जलांजलि): काले तिल, कुशा घास और शुद्ध जल से पितरों को तृप्त करना।
  2. 2
    संकल्प: गोत्र और नाम का उच्चारण कर पूर्वजों की मुक्ति और आशीर्वाद का संकल्प।
  3. 3
    त्रिपिंडी श्राद्ध: तीन पीढ़ियों के पितरों के लिए तीन आटे के पिंड तैयार कर पूजन।
  4. 4
    नारायण बलि (अकाल मृत्यु हेतु): अकाल मृत्यु से अतृप्त पितरों के लिए भगवान विष्णु की विशेष पूजा।
  5. 5
    सिद्धवट पूजन: अक्षय वट वृक्ष के समीप पिंडदान और दूध-जल का अर्पण।
  6. 6
    ब्राह्मण भोजन: पूजा के उपरांत ब्राह्मणों को सात्विक भोजन कराकर वस्त्र व दक्षिणा का दान।

आवश्यक पूजा सामग्री (Samagri List)

flare जौ, गेहूं और चावल का शुद्ध आटा (पिंड बनाने के लिए)
flare काले तिल, कुशा घास (कुश)
flare शहद, गंगाजल, गाय का कच्चा दूध
flare सफेद सूती धोती-दुपट्टा (यजमान हेतु)
flare सफेद कनेर या अन्य सफेद पुष्प, तुलसी पत्र
flare कपूर, धूपबत्ती, घी का दीपक, अक्षत
flare जौ का सत्तू, मिट्टी के बर्तन (दीये व कुल्हड़)
flare दान के लिए ब्राह्मणों हेतु वस्त्र व अनाज
⚠️ पिंडदान निर्देश: पितृ दोष निवारण पूजा हमेशा नदी तट या सिद्ध तीर्थों पर ही करनी चाहिए। पूजा के दिन यजमान को उपवास रखना चाहिए और पूजा के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।
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