पितृ दोष निवारण पूजा
सिद्धवट घाट (उज्जैन) पर पितरों के तर्पण, पिंडदान, त्रिपिंडी श्राद्ध एवं नारायण बलि द्वारा मुक्ति अनुष्ठान
पितृ दोष क्या है और इसके लक्षण?
जब परिवार में पूर्वजों (पितरों) का विधिपूर्वक तर्पण या पिंडदान नहीं होता, या किसी पूर्वज की अकाल मृत्यु हो जाती है, तो कुंडली में 'पितृ दोष' उत्पन्न होता है। इसके लक्षणों में परिवार में संतान न होना (वंश वृद्धि रुकना), विवाह न होना, संतान का अस्वस्थ रहना, घर में निरंतर अशांति रहना और कड़ी मेहनत के बाद भी धन की तंगी बने रहना शामिल है। शिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट मंदिर पर पिंडदान और त्रिपिंडी श्राद्ध करने से पितृ संतुष्ट होते हैं और परिवार को उन्नति व सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं।
उज्जैन में पूजा का महत्व:
उज्जैन के शिप्रा नदी तट पर स्थित 'सिद्धवट' (अक्षय वट) को पितृ कार्यों के लिए गया (बिहार) के समान फलदायी माना गया है। देवी पार्वती द्वारा रोपित इस वट वृक्ष के नीचे किया पिंडदान पितरों को सीधे तृप्ति देता है।
पूजा विधि (Step-by-Step Vidhi)
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1तर्पण (जलांजलि): काले तिल, कुशा घास और शुद्ध जल से पितरों को तृप्त करना।
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2संकल्प: गोत्र और नाम का उच्चारण कर पूर्वजों की मुक्ति और आशीर्वाद का संकल्प।
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3त्रिपिंडी श्राद्ध: तीन पीढ़ियों के पितरों के लिए तीन आटे के पिंड तैयार कर पूजन।
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4नारायण बलि (अकाल मृत्यु हेतु): अकाल मृत्यु से अतृप्त पितरों के लिए भगवान विष्णु की विशेष पूजा।
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5सिद्धवट पूजन: अक्षय वट वृक्ष के समीप पिंडदान और दूध-जल का अर्पण।
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6ब्राह्मण भोजन: पूजा के उपरांत ब्राह्मणों को सात्विक भोजन कराकर वस्त्र व दक्षिणा का दान।
आवश्यक पूजा सामग्री (Samagri List)
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calendar_month शुभ पूजा मुहूर्त 2026
श्राद्ध पक्ष का सर्वोत्तम काल योग
पितरों का विशेष पावन दिन
पितृ कार्यों के लिए सिद्ध नक्षत्र
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