वैदिक वास्तु शांति पूजा
नवीन गृह प्रवेश, भवन निर्माण या व्यावसायिक स्थल पर वास्तु दोषों के निवारण हेतु प्रामाणिक वैदिक अनुष्ठान
वास्तु दोष क्या है और इसके प्रभाव?
वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी भवन, दुकान, कार्यालय या औद्योगिक स्थल का निर्माण यदि वास्तु के नियमों के विपरीत हो, तो उस स्थान पर रहने या कार्य करने वाले व्यक्तियों को अनेक प्रकार की शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वास्तु दोष से घर में अशांति, पति-पत्नी में कलह, धन की हानि, व्यापार में मंदी, संतान को कष्ट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। वास्तु शांति पूजा एक प्रामाणिक वैदिक यज्ञ है जो इन सभी दोषों को शांत कर भवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख, समृद्धि और शांति का संचार करता है।
उज्जैन में पूजा का महत्व:
उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है और इसे भारत की वैदिक ग्रीनविच रेखा माना जाता है। यहाँ के पंचतत्वों का संतुलन सर्वश्रेष्ठ है, जिससे यहाँ किया गया वास्तु शांति यज्ञ अत्यंत प्रभावशाली होता है।
पूजा विधि (Step-by-Step Vidhi)
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1संकल्प एवं गणपति पूजन: वास्तु दोष निवारण और गृह शांति का संकल्प, प्रथम पूज्य गणेश जी का पूजन।
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2वास्तु पुरुष आवाहन: भवन के केंद्र (ब्रह्मस्थान) पर वास्तु पुरुष की प्रतीकात्मक स्थापना और पंचदेवता पूजन।
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3नवग्रह एवं दिक्पाल पूजन: सभी नौ ग्रहों और आठ दिशाओं के स्वामी (इंद्र, अग्नि, यम आदि) का विधिवत पूजन।
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4वास्तु शांति मंत्र जाप: वास्तु सूक्त, पुरुष सूक्त एवं श्री सूक्त का पारायण।
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5वास्तु शांति हवन: आम, पीपल व समिधा के साथ शुद्ध घी, नवधान्य और हवन सामग्री से यज्ञ।
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6गृह शुद्धि एवं प्रसाद: गंगाजल, गोमूत्र व कपूर से भवन की शुद्धि, प्रसाद वितरण और ब्राह्मण दक्षिणा।
आवश्यक पूजा सामग्री (Samagri List)
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